रिश�तों के अलग अर�थ
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ समाज में रिशà¥?ते-नाते अपनी विशेष मरà¥?यादाओं से बà¤?धे रहे हैं. हमसे à¤à¤¿à¤¨à¥?न संसà¥?कृति में पले लोगों को इन सीमाओं और मरà¥?यादाओं को समà¤?ने में और हमें उनà¥?हें समà¤?ा पाने में मà¥?शà¥?किल होती है. पर कà¥?या अब बदलते दौर में जब परिवार नाà¤à¤¿à¤•ीय हो रहे हैं, हमारी अपनी परिà¤à¤¾à¤·à¤¾à¤?à¤? à¤à¥€ बदलने लगेंगी. सà¥?नील अपने साथ हà¥?à¤? à¤?क वाकà¤? पर विचार कर रहे हैं.


























One comment
anil sharma
September 2nd, 2006, 5:16 am | #
Riste precious hote hai.But aapki bareeki risto mai koi khass hogi.But aap kaa research may be gives new outlook.Kudos
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