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सब ठीक है

आशीष का मानना है कि हिंदी के बारे में ज़�यादा चिंता की ज़रूरत नहीं.

[...] जिसे जो अच�छा लगे वो बोले म��े उसमें भी आपत�ति नही। ना ही अपनी तरफ से किसी पर हिन�दी थोपने का पक�षपाती हू� ना ही हिन�दी छोड़ने का। समय के साथ भाषा का जैसा विकास होगा देखा जायेगा। चू�कि हिन�दी मेरी मातृभाषा है इसलिये इसपर मेरी पकड़ अन�य भाषाओं से बेहतर है और बस यही कारण है कि इसका उपयोग जारी है।

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