नोबेल से प�रस�कृत त�र�की के लेखक पाम�क की ताज़ा किताब इस��तांब�ल का �क अंश प�रस�त�त करते ह��, प�रमोद सिंह अपने ब�लॉग अज़दक में लिखते हैं,
मीडिया के फरेब और à¤à¤¾à¤°à¥€ आरà¥?थिक विà¤à¤¾à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ वाले आज के à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ समाज में अचà¥?â€?छा लेखन दà¥?रà¥?लठहै. वैसा लेखन जिसमें विचारों की रवानी हो, अपने समय का मारà¥?मिक, जीवंत सà¥?â€?पंदन हो, संवेदनाओं की पारदरà¥?शी, विविड संकलà¥?â€?पनायें हों. जो आज के डिसà¥?â€?टà¥?रैकà¥?â€?टेड उपà¤à¥‹à¤•à¥?â€?ता समय में आसानी से ‘डेटेड’ होने की मà¥?शà¥?किलों को पà¥?रवीणता से मात करती हो-जिसमें पूरब और पशà¥?चिम के अचà¥?â€?छे लेखन की सà¥?घड़, सजीव चाशनी हो, और सोने पर सà¥?हागा की मानिंद जो à¤à¤°à¤ªà¥‚र मनोरंजन à¤à¥€ करे- à¤?सा लेखन तो अपनी गरीब बिरादरी में निशà¥?â€?चय ही अकलà¥?â€?पनीय और अपà¥?रापà¥?â€?य फैंटेसी समà¤?ा जायेगा. मगर तà¥?रà¥?की के ओरहान पामà¥?क हमें यह सब देते हैं. काफी सहजता से देते हैं, और काफी-काफी मातà¥?रा में देते हैं.










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