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ईश�वर सत�य है?

इस सवाल से भ�रमित अनामदास का उत�तर भ�रमित नहीं लगता.

[...] आस�तिक स�नना चाहता है ईश�वर है और नास�तिक उसका उल�टा. मैं बिना किसी भ�रम के कहना चाहता हू� कि मैं भ�रमित हू� क�योंकि म�� जैसों को भरमाने में कोई क़सर बाक़ी नहीं छोड़ी है, शास�त�रों, शास�त�रियों और अनीश�वरवादियों ने भी. मौजूदा स�थिति ये है कि जब म�सीबत होती है तो भगवान याद आता है वर�ना उसके होने और न होने के तर�क दिमाग़ को मथते हैं.

आसà¥?तिक और नासà¥?तिक की शà¥?रेणी में ही à¤?क और लेबल है अंगà¥?रेज़ी में – ‘à¤?गà¥?नॉसà¥?टिक’. इस विचारधारा के लोगों का मूलतः यह मानना है कि ईशà¥?वर अगर है तो अजà¥?ञेय है. कà¥?छ à¤?सा ही कहते हैं अनामदास,

यहीं से �क तर�क पनपता है कि ईश�वर को तर�क-वितर�क से नहीं पाया जा सकता क�योंकि हमें उसी ईश�वर ने इतनी क�षमता नहीं दी है कि हम उसे यू� ही सम� लें.

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