मसिजीवी से सà¥?निà¤? ‘à¤à¤¾à¤µ या मनोविकार’ का चिटà¥?ठा संसà¥?â€?करण
à¤à¤¾à¤µ बोले तो रेट। और à¤à¤¾à¤µ आजकल आसमान पर हैं। पहले à¤?क रà¥?पà¤? के बीस उपले आते थे अब à¤à¤¾à¤µ पॉंच रà¥?पà¤? के दस है। पहले टटपूंजी कविता पर पॉंच टिपà¥?â€?पणी मिल जाती थीं, अब बिना कतà¥?â€?लोगारत किà¤? कà¥?तà¥?â€?ता à¤à¥€ नहीं à¤?ांकता। वैसे à¤?क दूसरा à¤à¤¾à¤µ à¤à¥€ होता है सà¥?ख का दà¥?:ख का। पर वह असल दà¥?निया में होता है, इस यानि चिटà¥?ठाकारी में कोई सà¥?ख का à¤à¤¾à¤µ नहीं होता सिरà¥?फ दà¥?:ख होता है और उसके à¤à¤¿à¤¨à¥?â€?न à¤à¤¿à¤¨à¥?â€?न संसà¥?â€?करण होते हैं। दà¥?:ख में बà¥?â€?लॉगिंग सब करैं सà¥?ख में करै न कोय।










Comments
Comments are closed on this post.