स�टार न�यूज़ पर हमले के बहाने
नीरज à¤?क ओर “बजरंगियों” को à¤?िड़क रहे हैं,
पà¥?रियंका-उमर(उमेश) और खà¥?शी-क़ादिर इनकी नज़रों में खटकते हैं कà¥?योंकि ये इसी गंगा-जमनी तहज़ीब के वाहक हैं. ये à¤à¥‚ल जाते हैं कि इनके रथी आडवाणी की à¤à¤¤à¥€à¤œà¥€ ने à¤à¥€ मà¥?सà¥?लिम लड़के से विवाह किया था. सारी मरà¥?यादा और सामाजिक पाबंदियां आम आदमी के लिà¤? बनाते हैं. ये हिनà¥?दà¥?ओं को दस-दस बचà¥?चें पैदा करने का आहà¥?वान करते हैं और खà¥?द आजीवन अविवाहित रहने का संकलà¥?प करते हैं. आपस में कौन-सी ‘सिंकदरीयाई संसà¥?कृति’ विकसित करते हैं यह कहने की दरकार नहीं.
तो दूसरी ओर मीडिया को आड़े हाथों ले रहे हैं,
मैं यह मानता हूं कि हिनà¥?दू समाज (वà¥?यापक नहीं) अगर बदल रहा है, अपनी उदार, सहिषà¥?णà¥? और सरà¥?वगà¥?राही परंपरा को अपनी कायरता और अकरà¥?मणà¥?यता समà¤?ने लगा है, और संविधान, लोकतंतà¥?र और धरà¥?मनिरपेकà¥?षता के दà¥?रà¥?पयोग या उनकी तोड़-फोड़ के कारण उनमें विशà¥?वास खो चà¥?का है तो इसका थोड़ा-बहà¥?त अंदाज़ तो पà¥?रेस को होना चाहिà¤?. इसके उलट मीडिया के कà¥?छ गà¥?टों ने अपनी तेज़गीरी के चलते इन दिनों à¤à¤¸à¥?मासà¥?रों को पैदा कर दिया है.
























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