सà¥?नना चाहते हैं à¤?à¥?मरीतलैया से …
विविध à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€ के शौकीनों के लिà¤? à¤?à¥?मरीतलैया का नाम अपरिचित नहीं हो सकता. शायद ही फ़रमाइशी गीतों का कोई à¤?सा कारà¥?यकà¥?रम होता था जिसमें वहाà¤? से कोई अनà¥?रोध न हो. à¤?सा लगता था जैसे विविध à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€ को चिटà¥?ठियाà¤? à¤à¥‡à¤œà¤¨à¤¾ वहाà¤? का पà¥?रमà¥?ख कà¥?टीर उदà¥?योग हो. आह! रेडियो के वे दिन (और रातें). कमल शरà¥?मा समूह-चिटà¥?ठे रेडियोनामा में याद कर रहे हैं à¤?à¥?मरीतलैया के शà¥?रोताओं को. और कà¥?या ग़ज़ब की याददाशà¥?त पाई है उनà¥?होंने.
सही अर�थों में कहा जा� तो ��मरी तिलैया को विश��वविख��यात बनाने का श�रेय वहां के स��थानीय रेडियो श�रोताओं को जाता है जिनमें रामेश��वर प�रसाद वर�णवाल, गंगालाल मगधिया, क�लदीप सिंह आकाश, राजेंद�र प�रसाद, जगन��नाथ साहू, धर�मेंद�र क�मार जैन, पवन क�मार अग�रवाल, लखन साहू और हरेकृष��ण सिंह प�रेमी के नाम म�ख��य हैं। म�ंबई से प�रकाशित धर�मय�ग में वर�षों पहले छपे �क लेख में विष��ण� खरे ने लिखा था कि उदघोषक अमीन सयानी को प�रसिद�ध बनाने में ��मरी तिलैया के रेडियो श�रोताओं में खासतौर पर रामेश��वर प�रसाद वर�णवाल का हाथ है।

























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