पतनशील बनाम प्रगतिशील
चन्द्रभूषण या यानि चन्दू भाई हमेशा से ज्वलंत मुद्दों पर अपनी लेखनी चलाते रहे हैं. अब वह पतनशील और प्रगतिशील को अपने निजी अनुभव से तोल रहे हैं.
जमूरे की तरह उछल-उछलकर बात-बात पर बोलने की मेरी आदत नहीं है, न ही किसी बहस में इसलिए शामिल होता हूं कि लाला लोग इस जगह पड़ी टीपें गिनें ताकि देर-सबेर दो पैसे का जुगाड़ हो। मेरे लिए कोई भी शब्द सिर्फ बौद्धिक फैशन के लिए ग्राह्य या त्याज्य नहीं है। भाषा का जो भी हिस्सा मेरे दिल से नहीं सटता उसका मेरे लिए कोई मतलब नहीं है और जो सटता है उसे बचाने के लिए मैं जान देने और लेने की हद तक जाने में भी कोई बुराई नहीं समझता।

























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