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काग़ज़ की कश्‍ती डूब गयी…

"ये काग़ज़ की कश्‍ती वो बारिश का पानी’ लिखने वाले सुदर्शन फ़ाकिर नहीं रहे…उन्ही को श्रद्धांजली देते हुए युनुस उनकी कुछ चुनिदा नज्मों से परिचय करवा रहे हैं.

सुदर्शन फाकिर जिंदगी भर गुमनाम रहे, वो उन शायरों में से नहीं थे जो टेलीविजन या रेडियो की दुनिया में छाए रहें।वो ज्‍यादा इंटरव्‍यू भी नहीं देते थे । ये विडंबना ही है कि शायर सुदर्शन फाकिर की ग़ज़लें उनके नाम से ज्‍यादा लोकप्रिय हुईं।और नामवर हो गये वो लोग जिन्‍होंने सुदर्शन फाकिर को गाया।सुदर्शन तो बस चंडीगढ़ में एक गुमनाम जिंदगी जीते रहे और चुपके से चले भी गए।शायद मौत के ज़रिए भी सुर्खियों में आना उनको मंजूर नहीं था ।

Comments

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neelima
May 24th, 2008 at 5:40 am | #

this is the most beautiful gajal reminding one of childhood…