ईस्वामी पिछ्ले एक दशक से अमरीका में रह रहे हैं. वहां के समाज को वह नजदीक से देखते आये हैं और उसको लेकर उनका एक नजरिया भी है. अमरीका के नारीवादी अन्दोलन के खतरों के प्रति सतर्क करते हुए वह भारत की स्त्रीयों को अमरीकी आन्दोलन का अन्धानुकरण न करने की सलाह दे रहे हैं.
भारतीय स्त्रियों ने अपने लिये सोचने का ठेका पश्चिमी नारियों को दे दिया लगता है! उन्ही की तर्ज पर आपको नारीवादी होने के लिये पुरुष-विरोधी होने की जरूरत क्यों पडती है?
पश्चिमी नारी नें बराबरी का नारा बुलंद किया – वोट देने का अधिकार, न्याय का अधिकार, समान वेतन का अधिकार वो सब भारतीय नारी के पास कानूनी रूप से सुरक्षित ही है.
इसके आगे सामाजिक स्थिती के मामले में भारतीय नारी क्या चाहती है खुद उसे नहीं पता! वैसे उसका भविष्य कितना अंधकारमय है इसकी जानकारी भी उसे नहीं है.
पश्चिमी शैली की आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का नारा बुलन्द करती वर्किंग वुमन हो चुकने, आर्थिक स्वतंत्रता, समानता के नाम पर कुछ हद तक चारित्रिक स्वछंदता आदी के लिये चिल्ल-पों करती वीरांगनाओं को अपने से तीस-पैंतीस साल या २-३ पीढियों पहले यही सब कर चुकी पश्चिमी महिलाओं का हश्र देखना चाहिए!









Comments
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shrikant
Feb 25th, 2008 at 12:30 pm | #
I don’t thing so because here is not much not happing . If some mass cry is going on it not so show unstability in the society.
so it is not good to say that women future is not good and it is going to be dark in.
dinesh vashistha
Mar 26th, 2008 at 10:31 am | #
Indian working women ratiois much less then west and indian woman dont want to work more time she is working only either timepass(till marriage)or any financially problem due to husband or father otherwise she dont want to work.
Sarla Sethi
Apr 2nd, 2008 at 11:25 am | #
Marriage life of Indian women is succesful if she surrender herself.
BrijmohanShrivastava
Apr 15th, 2008 at 7:48 am | #
पहली बात -भारतीय नारी कभी पुरूष विरोधी नहीं रही न है
दूसरी बात-केवल अधिकार उसे है उनका ज्ञान नहीं है उसे सिर्ग कर्तव्य याद है लोभी लोलुप अत्याचारी शराबी अपराधी मारपीट करने वाला जुआ खेलने पैसे मांगने वाला और न देने पर पिटाई करने वाला प्रताडित करके मायके से सामान व नकदी मंगवाने वाला उसका पती परमेश्वर है आज्ञा पालन न किया तो रौरब नरक में आग में जलना होगा अगले जन्म में विधवा का जीवन विताना होगा
तीसरी बात-उसको भविष्य की जानकारी कराना बुद्धि जीवियों समाज सेवियों व विदुषी विद्वान् महिलाओं का काम है
चौथी बात -एस पद में वर्णित महिलाएं एक प्रतिशत होती हैं जो हर युग में रहीं है वे स्वेछाचारिता की भावना लेकर ही जन्म लेती हैं हर देश और हर समाज में
ravindra
May 13th, 2008 at 6:13 am | #
yes
Suresh Chandra Gupta
Jun 20th, 2008 at 5:19 am | #
यदि हम भारतीय समाज में नारी पर हो रहे अत्त्याचार की बात करें तो यह कहना पड़ता है कि इस अत्याचार की जिम्मेदारी ज्यादा नारी पर ही आती है. परिवार में आई नई बहू पर अगर अत्त्याचार होता है तो वह उसकी सास, ननद या जिठानी द्वारा ही किया जाता है. पति, ससुर या देवर द्वारा अत्त्याचार किए जाने के किस्से कम सुनने में आते हैं. पर हर अत्त्याचार के लिए पुरूष को ही दोषी करार दिया जाता है.
दहेज़ की लालसा सास और ननद को ज्यादा होती है. अच्छा दहेज़ न लाने के ताने भी वह ही मारती हैं. आस पास की औरतें ही कितना दहेज़ आया यह जानने को उत्सुक रहती हैं. अगर कोई बाहर की औरत दहेज कम होने का कटाक्ष कर देती है तो बहू को सास और ननद से ही जली कटी बातें सुननी पड़ती हैं. पति से कोई उस का दोस्त, या पुरूष रिश्तेदार, या दफ्तर का कोई साथी कभी दहेज के बारे में पूछ ताछ नहीं करते.
यदि नारी नारी पर अत्त्याचार करना बंद कर दे तो काफ़ी हद तक नारी आज उस पर हो रहे अत्त्याचार से मुक्त हो जायेगी.