DesiPundit » Hindi http://www.desipundit.com The Best of the Indian Blogosphere Tue, 13 May 2008 12:56:02 +0000 http://wordpress.org/?v=2.5.1 en अनुपम तालाब साधना http://www.desipundit.com/2008/05/07/anupam-mishra-a-true-contributer/ http://www.desipundit.com/2008/05/07/anupam-mishra-a-true-contributer/#comments Thu, 08 May 2008 01:19:12 +0000 काकेश http://www.desipundit.com/2008/05/07/anupam-mishra-a-true-contributer/ संजय तिवारी उदारीकरण और पर्यावरण के मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहे हैं.हाल ही मैं उन्होने विस्फोट पत्रिका को प्रारम्भ किया है. उसी में वह पर्यावरणविद अनुपम मिश्रा जी के बारे में बता रहे हैं.

वे लोकजीवन और लोकज्ञान के साधक हैं. अब न लोकजीवन की कोई परिधि या सीमा है और न ही लोकज्ञान की. इसलिए अनुपम मिश्र भी किसी सीमा या परिचय से बंधें हुए नहीं हैं. हालांकि उन्हें हमेशा ऐतराज रहता है जब कोई उनके बारे में बोले-कहे या लिखे. उन्हें लगता है कि उनके बारे में लिखने से अच्छा है उनकी किताब "आज भी खरे हैं तालाब" के बारे में दो शब्द लिखे जाएं. कितने लाख लोग अनुपम मिश्र को जानते हैं इससे कोई खास मतलब नहीं है कितनी प्रतियां इस किताब की बिकी हैं सारा मतलब इससे है. तो क्या अनुपम मिश्र अपनी रॉयल्टी की चिंता में लगे रहनेवाले व्यक्ति हैं जो अपनी किताब को लेकर इतने चिंतित रहते हैं? शायद. क्योंकि उनकी रायल्टी है कि समाज ज्यादा से ज्यादा तालाब के बारे में अपनी धारणा ठीक करें. पानी के बारे में अपनी धारणा ठीक करे. पर्यावरण के बारे में अपनी धारणा ठीक करे. भारत और भारतीयता के बारे में अपनी धारणा शुद्ध करे. अगर यह सब होता है तो अनुपम मिश्र को उनकी रायल्टी मिल जाती है. और किताब पर लिखा यह वाक्य आपको प्रेरित करे कि इस पुस्तक पर कोई कॉपीराईट नहीं है, तो आप इस किताब में छिपी ज्ञानगंगा का अपनी सुविधानुसार जैसा चाहें वैसा प्रवाह निर्मित कर सकते हैं. यह जिस रास्ते गुजरेगी कल्याण करेगी.

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2008/05/07/anupam-mishra-a-true-contributer/feed/
डब्बाबंद मुल्क में बड़ी होती लड़की.. http://www.desipundit.com/2008/02/28/growing-girl-in-sealed-country/ http://www.desipundit.com/2008/02/28/growing-girl-in-sealed-country/#comments Fri, 29 Feb 2008 05:36:52 +0000 काकेश http://www.desipundit.com/2008/02/28/growing-girl-in-sealed-country/ मनीषा इस पितृसत्तात्मक मुल्क में यौवन की दहलीज पर कदम रखती लड़की का शब्द चित्र खींच रही हैं. 

अच्‍छे घरों की अच्‍छी लड़कियाँ विले पार्ले स्‍टेशन पर उतरते ही अच्‍छी लड़की का चोंगा सीढि़यों के नीचे छिपा कॉलेज और समंदर के सिम्‍त जाने वाली सड़क का रुख करतीं और शाम को घर लौटते हुए सीढि़यों के नीचे से चोंगा उठाती जाती थीं। मुझे फोन करके स्‍वीकारोक्तियाँ करतीं, हाल-ए-दिल बयां करतीं। दीदी, आय एम इन लव। वो टॉल, डार्क, हैंडसम मेरा ब्‍वायॅफ्रेंड है। मैंने हमेशा समझाना चाहा, अच्‍छे लोगों के घर से आजादी तभी मिलेगी, जब अपने पैरों पर खड़ी होगी। वरना ब्‍वॉयफ्रेंड तो आज्ञाकारी पुत्र की तरह इनकम टैक्‍स अफसर की बेटी के साथ लगाएगा फेरे और तुम पैर में आलता लगाकर पति के घर में विम बार से बर्तन धोना। उसे घर ले जाओगी तो तुम्‍हें तो बाद में, ब्‍वॉयफ्रेंड को पहले लातों का हार पहनाया जाएगा।

इसी श्रंखला के अगले भाग में वह कहती हैं.

सीलबंद ढक्‍कन वाले डिब्‍बे जैसी दुनिया में रहती थीं लडकियाँ। डिब्‍बे में कोई आता-जाता तो था नहीं। एक मुई चींटी तक तो आती नहीं। अपने दिल की कहें भी तो किससे। सो डिब्‍बाबंद मुल्‍क की बड़ी होती लड़कियां अपने अकेलेपन को अकेले में ही गुनती-बुनती, अकेले ही जूझती रहतीं सबकुछ से।

मैं भी इसी डिब्‍बाबंद मुल्‍क की एक लड़की थी। बड़ी चाशनी घुली थी, जिंदगी में जवानी की तरंगों के आने से। चाशनी में सिमोन मार्का नारीवाद का छौंका भी लग गया। सब गड्डम-गड्ड।

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2008/02/28/growing-girl-in-sealed-country/feed/
क्या स्त्री का भविष्य अन्धकार-मय है? http://www.desipundit.com/2008/02/23/amarican-faminism-and-indian-women/ http://www.desipundit.com/2008/02/23/amarican-faminism-and-indian-women/#comments Sun, 24 Feb 2008 01:36:45 +0000 काकेश http://www.desipundit.com/2008/02/23/amarican-faminism-and-indian-women/ ईस्वामी पिछ्ले एक दशक से अमरीका में रह रहे हैं. वहां के समाज को वह नजदीक से देखते आये हैं और उसको लेकर उनका एक नजरिया भी है. अमरीका के नारीवादी अन्दोलन के खतरों के प्रति सतर्क करते हुए वह भारत की स्त्रीयों को अमरीकी आन्दोलन का अन्धानुकरण न करने की सलाह दे रहे हैं. 

 

भारतीय स्त्रियों ने अपने लिये सोचने का ठेका पश्चिमी नारियों को दे दिया लगता है! उन्ही की तर्ज पर आपको नारीवादी होने के लिये पुरुष-विरोधी होने की जरूरत क्यों पडती है?

पश्चिमी नारी नें बराबरी का नारा बुलंद किया - वोट देने का अधिकार, न्याय का अधिकार, समान वेतन का अधिकार वो सब भारतीय नारी के पास कानूनी रूप से सुरक्षित ही है.

इसके आगे सामाजिक स्थिती के मामले में भारतीय नारी क्या चाहती है खुद उसे नहीं पता! वैसे उसका भविष्य कितना अंधकारमय है इसकी जानकारी भी उसे नहीं है.

पश्चिमी शैली की आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का नारा बुलन्द करती वर्किंग वुमन हो चुकने, आर्थिक स्वतंत्रता, समानता के नाम पर कुछ हद तक चारित्रिक स्वछंदता आदी के लिये चिल्ल-पों करती वीरांगनाओं को अपने से तीस-पैंतीस साल या २-३ पीढियों पहले यही सब कर चुकी पश्चिमी महिलाओं का हश्र देखना चाहिए!

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2008/02/23/amarican-faminism-and-indian-women/feed/
पुरी की यात्रा के अनुभव व धर्म http://www.desipundit.com/2008/02/22/religion-without-boundary/ http://www.desipundit.com/2008/02/22/religion-without-boundary/#comments Fri, 22 Feb 2008 09:53:49 +0000 काकेश http://www.desipundit.com/2008/02/22/religion-without-boundary/ सुनील दीपक अभी अभी भारत यात्रा से लौटे हैं.पुरी (उड़ीसा) में जगन्नाथ मंदिर की यात्रा करते समय कुछ बातें उनके मन में आयी जिन्हे वह हमारे साथ बांट रहे हैं. 

वैसे व्यक्तिगत रूप में मेरे लिए धार्मिकता और मंदिर में जा कर पूजा करने में कोई विषेश सम्बंध नहीं क्योंकि मेरे लिए धार्मिकता अधिक आध्यात्मिक एवं अंतर्मुखी है. धर्म और आस्था पर बात करना मुझे कठिन भी लगता है क्योंकि महसूस करता हूँ कि इस बारे में मेरे विचार स्पष्ट नहीं, और कई बार अंतर्विरोधी भी है. यह भी लगता है कि कितना भी लिख लो, कुछ न कुछ बात अधूरी ही रह जायेगी.

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2008/02/22/religion-without-boundary/feed/
काग़ज़ की कश्‍ती डूब गयी… http://www.desipundit.com/2008/02/20/a-tribute-to-sudarshan-fakir/ http://www.desipundit.com/2008/02/20/a-tribute-to-sudarshan-fakir/#comments Thu, 21 Feb 2008 05:15:29 +0000 काकेश http://www.desipundit.com/2008/02/20/a-tribute-to-sudarshan-fakir/ "ये काग़ज़ की कश्‍ती वो बारिश का पानी’ लिखने वाले सुदर्शन फ़ाकिर नहीं रहे…उन्ही को श्रद्धांजली देते हुए युनुस उनकी कुछ चुनिदा नज्मों से परिचय करवा रहे हैं.

सुदर्शन फाकिर जिंदगी भर गुमनाम रहे, वो उन शायरों में से नहीं थे जो टेलीविजन या रेडियो की दुनिया में छाए रहें।वो ज्‍यादा इंटरव्‍यू भी नहीं देते थे । ये विडंबना ही है कि शायर सुदर्शन फाकिर की ग़ज़लें उनके नाम से ज्‍यादा लोकप्रिय हुईं।और नामवर हो गये वो लोग जिन्‍होंने सुदर्शन फाकिर को गाया।सुदर्शन तो बस चंडीगढ़ में एक गुमनाम जिंदगी जीते रहे और चुपके से चले भी गए।शायद मौत के ज़रिए भी सुर्खियों में आना उनको मंजूर नहीं था ।

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2008/02/20/a-tribute-to-sudarshan-fakir/feed/
दिहाड़ी मजदूर http://www.desipundit.com/2008/02/20/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a5%9c%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b0/ http://www.desipundit.com/2008/02/20/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a5%9c%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b0/#comments Thu, 21 Feb 2008 04:25:18 +0000 अनूप http://www.desipundit.com/2008/02/20/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a5%9c%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b0/ ज्ञानदत्त पाण्डेयजी नियमित लिखने वाले हैं। उनका ब्लाग उनकी मानसिक हलचल का आईना है। वे जहां कहीं जाते हैं , उनका कैमरा उनके साथ होता है। कल ‘डिटूर’ पर निकले तो दिहाड़ी मजूर दिखे। आप भी उनकी नजर से देखिये -

जहां ये लोग इकठ्ठा होते हैं, वहां रेल की संकरी पुलिया है। सड़क भी ऊबड़ खाबड़ है। लिहाजा वाहन धीरे धीरे निकलता है वहां से। सड़क के दोनो ओर बैठे हुये लोगों का अच्छा अवलोकन हो जाता है। कुछ तो पूरी बांह का स्वेटर पहने, मफलर लगाये और सिर पर टोपी रखे होते हैं। कुछ के पास तो गरम कपड़े दीखते ही नहीं। यूंही कंपकंपाते गुड़मुड़ बैठे नजर आते हैं। कुछ के पास साइकलें होती हैं। कुछ बिना साइकल होते हैं। इक्का-दुक्का के पास दोपहर के भोजन के डिब्बे भी नजर आते हैं।

इन दिहाड़ी मजूरों की जिंदगी का संपन्न लोगों से अध्ययन करते हुये वे कहते हैं-

आदमी आखिर निरपेक्ष नहीं, तुलनात्मक अवस्था में जीता है। किसी बड़े उद्योगपति को मेरी अवस्था में डाल दें तो शायद वह आत्महत्या कर ले! लिहाजा उस कोण से सोचना तो इन लोगों को ग्लैमराइज और अपने को निरर्थक बताना होगा। पर यह जरूर है कि ये लोग देश के निर्माण में कण्ट्रीब्यूट करने में हमसे कमतर नहीं – शायद ज्यादा ही होंगे।

आगे वे इनसे जुड़ने के अपनी मंशा भी जाहिर करते हैं ताकि उनकी सोच में परिवर्तन आ सके-

मैं इस अवस्था में दिहाड़ी पर मजदूरी शायद न करूं या न कर सकूं; पर ब्रिकलेयर एसोशियेशन का सदस्य अवश्य बनना चाहूंगा। और अगर ऐसी कोई एसोशियेशन भारत में न हो तो कम से कम राज-मिस्त्री का काम जानना चाहूंगा। उससे श्रम की महत्ता पर मेरी सोच में गुणात्मक परिवर्तन आयेगा।

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2008/02/20/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a5%9c%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b0/feed/
क्या मैं पतित होना नहीं चाहती ? http://www.desipundit.com/2008/02/20/a-person-want-to-do-this/ http://www.desipundit.com/2008/02/20/a-person-want-to-do-this/#comments Wed, 20 Feb 2008 14:26:21 +0000 काकेश http://www.desipundit.com/2008/02/20/a-person-want-to-do-this/ प्रत्यक्षा का आत्मालाप कमोबेश हर एक स्त्री और पुरुष का आत्मालाप हो सकता है.जरूरत है तो इसे अपने अंदर कुरेदने की.

मैं प्रगतिशील कहलाने के लिये पश्चिमी कपड़े पहनूँ , गाड़ी चलाऊँ , सिगरेट शराब पियूँ , देर रात आवारागर्दी करूँ ऐसे स्टीरियोटाइप में नहीं फँसना चाहती । मैं ये सिर्फ तब ही करना चाहूँगी जब ये करना मेरी मर्जी में होगा , सिर्फ किसी और के बनाये ढाँचे में फिट होने या मात्र फॉर द सेक तोड़ फोड़ करने के लिये नहीं । मेरे चुनाव मेरे अपने होंगे किसी और के थोपे हुये नहीं । मेरे रास्ते मेरे होंगे , उनके काँटे भी मेरे , फूल तो मेरे ही ।

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2008/02/20/a-person-want-to-do-this/feed/
आम बजट की खास खास बातें http://www.desipundit.com/2008/02/20/a-satire-on-budget/ http://www.desipundit.com/2008/02/20/a-satire-on-budget/#comments Wed, 20 Feb 2008 11:41:57 +0000 काकेश http://www.desipundit.com/2008/02/20/a-satire-on-budget/ देश का बजट एक सालाना कार्यक्रम है इसी के बारे में अपने व्यंग्यात्मक लहज़े में शिवकुमार मिश्र पूरा का पूरा निबेंध छाप दे रहे हैं. उनका यह निबंध भारतीय आम बजट की खास खास बातों से परिचय कराता है.

बजट प्रस्तुति के बाद पुतले जलाने, रास्ता रोकने और बंद करने के कार्यक्रमों के अलावा एक और कार्यक्रम होता है जिसे बजट के ‘टीवीय विमर्श’ के नाम से जाना जाता है. ऐसे विमर्श में टीवी पर बैठे पत्रकार और उद्योगपति बजट देखकर वित्तमंत्री को नम्बर देने का सांस्कृतिक कार्यक्रम चलाते हैं. देश में लोकतंत्र है, इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण बजट के दिन देखने को मिलता है. एक ही बजट पर तमाम उद्योगपति और जानकार वित्तमंत्री को दो से लेकर दस नम्बर तक देते हैं. लोकतंत्र पूरी तरह से मजबूत है, इस बात को दर्शाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों में बीच-बीच में ‘आम आदमी’ का वक्तव्य भी दिखाया जाता है.

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2008/02/20/a-satire-on-budget/feed/
पतनशील बनाम प्रगतिशील http://www.desipundit.com/2008/02/18/my-sister-tought-me-a-lesson/ http://www.desipundit.com/2008/02/18/my-sister-tought-me-a-lesson/#comments Tue, 19 Feb 2008 05:13:45 +0000 काकेश http://www.desipundit.com/2008/02/18/my-sister-tought-me-a-lesson/ चन्द्रभूषण या यानि चन्दू भाई हमेशा से ज्वलंत मुद्दों पर अपनी लेखनी चलाते रहे हैं. अब वह पतनशील और प्रगतिशील को अपने निजी अनुभव से तोल रहे हैं.

जमूरे की तरह उछल-उछलकर बात-बात पर बोलने की मेरी आदत नहीं है, न ही किसी बहस में इसलिए शामिल होता हूं कि लाला लोग इस जगह पड़ी टीपें गिनें ताकि देर-सबेर दो पैसे का जुगाड़ हो। मेरे लिए कोई भी शब्द सिर्फ बौद्धिक फैशन के लिए ग्राह्य या त्याज्य नहीं है। भाषा का जो भी हिस्सा मेरे दिल से नहीं सटता उसका मेरे लिए कोई मतलब नहीं है और जो सटता है उसे बचाने के लिए मैं जान देने और लेने की हद तक जाने में भी कोई बुराई नहीं समझता।

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2008/02/18/my-sister-tought-me-a-lesson/feed/
क्या लड़कियाँ भी पतित होना चाहती हैं? http://www.desipundit.com/2008/02/18/girls-also-want-to-fly-like-boys/ http://www.desipundit.com/2008/02/18/girls-also-want-to-fly-like-boys/#comments Mon, 18 Feb 2008 07:05:30 +0000 काकेश http://www.desipundit.com/2008/02/18/girls-also-want-to-fly-like-boys/ "चोखेर बाली" यानि "आंख की किरकिरी" में मनीषा अपनी पतित इच्छाओं के बारे में बता रही हैं.वो मानती हैं वो साइको हैं और शायद अकेली नहीं हैं.

वैसे पतनशील होना ज्‍यादा आसान है और अच्‍छी लड़की बनने की बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। हो सकता है, मेरे जैसी और ढेरों लड़कियां हों, जो अपनी पतनशीलता को छिपाती फिरती हैं, अच्‍छी लड़की के सर्टिफिकेट की चिंता में। डर रही हूं, कि खुद ही ओखल में सिर दे दिया है, लेकिन अब दे दिया तो दे दिया। चार और साथिनें आगे बढ़कर अपनी पतनशील इच्‍छाएं व्‍यक्‍त करेंगी, तो दिल को कुछ सुकून मिलेगा। लगेगा, मैं ही नहीं हूं साइको, और भी हैं मेरे साथ।

हो सकता है अब और भी लड़कियां (या लड़के भी) अपनी पतित इच्छा के बारे में बतायें.

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2008/02/18/girls-also-want-to-fly-like-boys/feed/
अर्थ का अर्थ या अनर्थ http://www.desipundit.com/2008/02/18/do-we-know-the-economics/ http://www.desipundit.com/2008/02/18/do-we-know-the-economics/#comments Mon, 18 Feb 2008 06:23:35 +0000 काकेश http://www.desipundit.com/2008/02/18/do-we-know-the-economics/ अनिल रघुराज वैसे तो अपनी विश्लेष्णात्मक लेखों के लिये जाने जाते हैं. लेकिन आज वह देश की अर्थव्यवस्था को आम आदमी से जोड़ने के बारे में बात कर रहे हैं.

 

कितनी अजीब बात है कि हम सभी अर्थ के पीछे भाग रहे हैं, लेकिन आर्थिक शब्दों का सामना होते ही उल्टा भागना शुरू करते हैं। सोचते हैं कि इनसे हमको क्या लेनादेना। इन्हें समझना है तो अर्थशास्त्री, विद्यार्थी, पत्रकार उद्योगपति या कारोबारी समझें। हम इन्हें समझकर क्या करेंगे? लेकिन आज के जमाने में ऐसा वीतरागी नज़रिया बड़ा घातक है। अर्थ के तमाम शब्दों को समझना बहुत ज़रूरी है क्योकि इनका गहरा वास्ता हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से है।

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2008/02/18/do-we-know-the-economics/feed/
ग?प?तार?थशास?त?र http://www.desipundit.com/2007/11/07/guptaarthshaastra/ http://www.desipundit.com/2007/11/07/guptaarthshaastra/#comments Wed, 07 Nov 2007 15:52:29 +0000 v9y http://www.desipundit.com/2007/11/07/guptaarthshaastra/ कोला की बिक?री और पब?लिक टॉयलेट में क?या रिश?ता है इसे फ?रीकॉनॉमिक?सी नज़रिये से देखा रमा बीजाप?रकर ने. अनिल रघ?राज अपने ब?लॉग पर इसका ज़िक?र कर रहे हैं.

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2007/11/07/guptaarthshaastra/feed/
पाकिस?तान से http://www.desipundit.com/2007/11/06/pakistan-se/ http://www.desipundit.com/2007/11/06/pakistan-se/#comments Tue, 06 Nov 2007 17:39:53 +0000 v9y http://www.desipundit.com/2007/11/06/pakistan-se/ भारतीय पत?रकार उमाशंकर सिंह पाकिस?तान से इमरजेंसी की आ?खन-देखी लिख रहे हैं.

काफी देर से मेरा मोबाइल नही बजा है. लगा कहीं बंद तो नहीं हो गया. देखा तो चालू था. पाकिस?तानी समय के हिसाब से ६ बज कर ४८ मिनट पर म?नीर जी का मैसेज था. EMERGENCY IN THE COUNTRY.

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2007/11/06/pakistan-se/feed/
बेजी के बाबूजी http://www.desipundit.com/2007/11/06/beji-ke-babuji/ http://www.desipundit.com/2007/11/06/beji-ke-babuji/#comments Tue, 06 Nov 2007 17:19:34 +0000 v9y http://www.desipundit.com/2007/11/06/beji-ke-babuji/

पापा का हाथ ?कदम सख?त ह?आ करता था। पकड़ो तो लगता कि किसी मज़बूत सहारे को पकड़ रखा है। अक?सर हाथ लेकर बैठ जाती “पापा आपकी भाग?य की रेखा कितनी छोटी है?” पापा ह?स कर कहते, “मेरी किस?मत में त?म?हारी मम?मी लिखी थी … बाकी सब उसकी किस?मत में लिखा है।”

म?स?क?राहट और संवेदनशीलता बेजी के ब?लॉग के हर पिक?सल में देखी जा सकती है. याद कर रही हैं अपने पापा और बचपन से ज?ड़ी क?छ बातों को.

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2007/11/06/beji-ke-babuji/feed/
रावण क?यों र?लाता है http://www.desipundit.com/2007/10/22/raavan-kyon-rulaata-hai/ http://www.desipundit.com/2007/10/22/raavan-kyon-rulaata-hai/#comments Mon, 22 Oct 2007 14:18:47 +0000 v9y http://www.desipundit.com/2007/10/22/raavan-kyon-rulaata-hai/ क?योंकि उसका नाम ही रावण है. नहीं सम?े? तो इस शब?द की यात?रा पर चलि? अजित के साथ उनके दिलचस?प और ज?ञानवर?द?धक भाषा ब?लॉग पर.

‘र?’ में शोर मचाना, चिंघाड़ना, दहाड़ना आदि भी शामिल है। इससे ही बना है संस?कृत शब?द रावः जिसका मतलब है भयानक ध?वनि करना। चीत?कार करना। चीखना-चिल?लाना। हू-हू-हू जैसी भयकारी आवाज़ें निकालना आदि। रावः से ही बना है रावण जिसका अर?थ ह?आ भयानक आवाजें करने वाला, चीखने-चिल?लाने वाला, दहाड़ने वाला।

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2007/10/22/raavan-kyon-rulaata-hai/feed/
महज प?रतीकों का देश http://www.desipundit.com/2007/10/19/mahaj-pratiikon-ka-desh/ http://www.desipundit.com/2007/10/19/mahaj-pratiikon-ka-desh/#comments Fri, 19 Oct 2007 13:31:16 +0000 v9y http://www.desipundit.com/2007/10/19/mahaj-pratiikon-ka-desh/

अदभ?त देश है जहा? ‘जय माता की’ और ‘तेरी मा? की’…?क जैसे उत?साह के साथ उच?चारे जाते हैं. माता का यूनिवर?सल सम?मान भी है, यूनिवर?सल अपमान भी.

नौ दिन तक जगराते होंगे, पूजा होगी, हवन होंगे, मदिरापान-मा?सभक?षण तज दिया जा?गा और देवी प?रतिमा की भक?ति होगी, मगर साक?षात नारी के सामने आते ही प?रौढ़ देवीभक?त की आ?खें भी वहीं टिक जा??गी जहा? पैदा होते ही टिकी थीं.

- अनामदास, नारी और देवी में कि? जाने वाले फ़र?क पर

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2007/10/19/mahaj-pratiikon-ka-desh/feed/
अच?छा लगने की तलाश http://www.desipundit.com/2007/09/28/achchha-lagane-ki-talaash/ http://www.desipundit.com/2007/09/28/achchha-lagane-ki-talaash/#comments Fri, 28 Sep 2007 17:56:13 +0000 v9y http://www.desipundit.com/2007/09/28/achchha-lagane-ki-talaash/ समीर लाल ने सर म??डाया और ओले पड़े, यानि ?क दिन छाता ले जाना भूले और बारिश बरस पड़ी.

अपनी गलती कौन मानता है कि छाता लेकर निकलते तो इन?तजार न करना पड़ता. म??े तो सारी गलती बारिश, बादल और मौसम की ही लगती है. अच?छा लग रहा है अपनी खी? उतार कर.

बस, इसी अच?छा लगने की तलाश में हर जतन जारी है.

पता नहीं क?यू?, कार में बैठते ही मैथिली की यह कजरी ?ूम ?ूम के गाने का मन करने लगा, सीट पर बैठे बैठे थोड़ा सा नाच भी लेता हू?, कोई देख नहीं रहा. अच?छा लग रहा है:

बदरा उमरी घ?मरी घन गरजे
बू?दिया बरिसन लागे न…..

आप भी स?निये न!! विश?वास जानिये, अच?छा लगेगा!!!

ये भीगी-भीगी दास?तान और ताज़ा भीगी मिट?टी की ख़?शबू वाली ?क कजरी स?नने के लि? समीर की उड़न तश?तरी का र?ख़ कीजि?.

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2007/09/28/achchha-lagane-ki-talaash/feed/
दस लाख लोग और “स?मॉल-टाउन”? http://www.desipundit.com/2007/09/21/das-laakh-log-aur-small-town/ http://www.desipundit.com/2007/09/21/das-laakh-log-aur-small-town/#comments Fri, 21 Sep 2007 20:06:35 +0000 v9y http://www.desipundit.com/2007/09/21/%e0%a4%a6%e0%a4%b8-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%96-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%97-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%89%e0%a4%b2-%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a8/ रवीश का ग़?स?सा है महानगरीय विचारकों और पत?रकारों द?वारा “स?मॉल-टाउन” शब?द के अज?ञान भरे इस?तेमाल पर.

स?माल टाउन किसे कहेंगे? रीवां, सासाराम, जलगांव या मोतिहारी को या फिर रांची, आगरा को। दिल?ली म?ंबई, प?णे, बंगलौर और कोलकाता से बाहर क?या हर शहर स?माल टाउन है?

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2007/09/21/das-laakh-log-aur-small-town/feed/
स?नना चाहते हैं ??मरीतलैया से … http://www.desipundit.com/2007/09/19/sunana-chahate-hain-jhumritalaiya-se/ http://www.desipundit.com/2007/09/19/sunana-chahate-hain-jhumritalaiya-se/#comments Wed, 19 Sep 2007 14:58:53 +0000 v9y http://www.desipundit.com/2007/09/19/sunana-chahate-hain-jhumritalaiya-se/ विविध भारती के शौकीनों के लि? ??मरीतलैया का नाम अपरिचित नहीं हो सकता. शायद ही फ़रमाइशी गीतों का कोई ?सा कार?यक?रम होता था जिसमें वहा? से कोई अन?रोध न हो. ?सा लगता था जैसे विविध भारती को चिट?ठिया? भेजना वहा? का प?रम?ख क?टीर उद?योग हो. आह! रेडियो के वे दिन (और रातें). कमल शर?मा समूह-चिट?ठे रेडियोनामा में याद कर रहे हैं ??मरीतलैया के श?रोताओं को. और क?या ग़ज़ब की याददाश?त पाई है उन?होंने.

सही अर?थों में कहा जा? तो ??मरी तिलैया को विश??वविख??यात बनाने का श?रेय वहां के स??थानीय रेडियो श?रोताओं को जाता है जिनमें रामेश??वर प?रसाद वर?णवाल, गंगालाल मगधिया, क?लदीप सिंह आकाश, राजेंद?र प?रसाद, जगन??नाथ साहू, धर?मेंद?र क?मार जैन, पवन क?मार अग?रवाल, लखन साहू और हरेकृष??ण सिंह प?रेमी के नाम म?ख??य हैं। म?ंबई से प?रकाशित धर?मय?ग में वर?षों पहले छपे ?क लेख में विष??ण? खरे ने लिखा था कि उदघोषक अमीन सयानी को प?रसिद?ध बनाने में ??मरी तिलैया के रेडियो श?रोताओं में खासतौर पर रामेश??वर प?रसाद वर?णवाल का हाथ है।

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2007/09/19/sunana-chahate-hain-jhumritalaiya-se/feed/
या तो ख़?द स?भल जाओ या… http://www.desipundit.com/2007/09/18/ya-to-khud-sambhal/ http://www.desipundit.com/2007/09/18/ya-to-khud-sambhal/#comments Tue, 18 Sep 2007 17:30:11 +0000 v9y http://www.desipundit.com/2007/09/18/ya-to-khud-sambhal/ सरकारी आचार संहिता की आशंका से टीवी चैनल आजकल इस सोच और बहस में लगे हैं कि क?या मीडिया को आत?मनियंत?रण के लि? ख़?द क?छ करना चाहि?. इसी से ज?ड़े क?छ दूसरे म?द?दों पर क?छ प?रम?ख पत?रकारों से तीखी असहमति व?यक?त कर रहे हैं रीतेश.

See Also: Text Link Ads Monetize your blog. No clicks needed.

]]>
http://www.desipundit.com/2007/09/18/ya-to-khud-sambhal/feed/